Daily Mantra
Shiva Tandava Stotram with 16 shloks and Hindi meanings.
Sacred Notes
Daily Mantra
Sacred Rhythm
Shiva Tandava Shlok
A powerful daily mantra card with Sanskrit verse and spiritual energy.
जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् ।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ॥
शिव के ताण्डव की यह स्तुति ऊर्जा, निर्भयता, भक्ति और अंतर्मन की स्पष्टता का अनुभव कराती है।
जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् ।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ॥
हिंदी अर्थ: जिनकी जटाओं से बहती गंगा उनके कंठ को पवित्र करती है, जिनके गले में विशाल सर्पों की माला है और जिनके डमरू की गूंज से ताण्डव प्रकट होता है, वे भगवान शिव हमें कल्याण प्रदान करें।
जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी-
विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके
किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ॥
हिंदी अर्थ: जिनके मस्तक पर जटाओं में विचरती गंगा की तरंगें शोभायमान हैं, जिनके ललाट में अग्नि प्रज्वलित है और जो शशिधर हैं, उन भगवान शिव में मेरा मन हर क्षण अनुरक्त रहे।
धराधरेन्द्रनंदिनीविलासबन्धुबन्धुर
स्फुरद्दिगन्तसन्ततिप्रमोदमानमानसे ।
कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धरापदि
क्वचिद्दिगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥
हिंदी अर्थ: जो पार्वतीजी के प्रिय सहचर हैं, जिनका मन समस्त जगत के आनंद से भरा है और जिनकी कृपादृष्टि कठिन से कठिन संकटों को रोक देती है, उन दिगम्बर शिव में मेरा मन आनन्द पाए।
जटाभुजङ्गपिङ्गलस्फुरत्फणामणिप्रभा
कदम्बकुङ्कुमद्रवप्रलिप्तदिग्वधूमुखे ।
मदान्धसिन्धुरस्फुरत्त्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदमद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ॥
हिंदी अर्थ: जिनकी जटाओं में सर्पमणियों की आभा दिशाओं को रंग देती है और जो गजचर्म धारण किए हुए समस्त प्राणियों के पालनकर्ता हैं, वे शिव मेरे मन को अद्भुत आनन्द दें।
सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर
प्रसूनधूलिधोरणी विधूसराङ्घ्रिपीठभूः ।
भुजङ्गराजमालया निबद्धजाटजूटक
श्रियै चिराय जायतां चकोरबन्धुशेखरः ॥
हिंदी अर्थ: जिनके चरणों को देवताओं के पुष्पधूलि से शोभा मिलती है, जिनकी जटाएँ सर्पराज की माला से बंधी हैं और जिनके शीश पर चन्द्रमा सुशोभित है, वे शिव हमें स्थायी समृद्धि दें।
ललाटचत्वरज्वलद्धनञ्जयस्फुलिङ्गभा-
निपीतपञ्चसायकं नमन्निलिम्पनायकम् ।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं
महाकपालिसम्पदेशिरोजटालमस्तु नः ॥
हिंदी अर्थ: जिनके ललाट की अग्नि ने कामदेव को भस्म किया, जिन्हें देवता नमन करते हैं और जिनके मस्तक पर चन्द्रकला शोभित है, उनकी जटाओं की महिमा हमें सिद्धि और मंगल प्रदान करे।
करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-
द्धनञ्जयाहुतीकृतप्रचण्डपञ्चसायके ।
धराधरेन्द्रनन्दिनीकुचाग्रचित्रपत्रक-
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम ॥
हिंदी अर्थ: जिन त्रिनेत्रधारी शिव के प्रचंड ललाटाग्नि ने कामदेव को भस्म कर दिया और जो पार्वतीजी के अलंकरण के अद्वितीय कलाकार हैं, उन भगवान में मेरी अटल प्रीति बनी रहे।
नवीनमेघमण्डली निरुद्धदुर्धरस्फुरत्-
कुहूनिशीथिनीतमः प्रबन्धबद्धकन्धरः ।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिन्धुरः
कलानिधानबन्धुरः श्रियं जगद्धुरंधरः ॥
हिंदी अर्थ: जिनका कंठ अमावस्या की अंधेरी रात्रि समान गम्भीर है, जो गंगा को धारण करते हैं, चर्मवस्त्र पहने हैं और चन्द्रकला से सुशोभित होकर जगत का भार संभालते हैं, वे शिव हमें वैभव दें।
प्रफुल्लनीलपङ्कजप्रपञ्चकालिमप्रभा-
वलम्बिकण्ठकन्दलीरुचिप्रबद्धकन्धरम् ।
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमन्तकच्छिदं भजे ॥
हिंदी अर्थ: मैं उन शिव की वंदना करता हूँ जो कामदेव, त्रिपुर, संसारबंधन, दक्षयज्ञ, गजासुर, अंधक और यम के अहंकार का भी नाश करने वाले हैं।
अखर्वसर्वमङ्गलाकलाकदम्बमञ्जरी
रसप्रवाहमाधुरी विजृम्भणामधुव्रतम् ।
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं
गजान्तकान्धकान्तकं तमन्तकान्तकं भजे ॥
हिंदी अर्थ: मैं उन शिव को प्रणाम करता हूँ जो समस्त मंगलों के आधार हैं, जिनकी दिव्य माधुरी पर भँवरे मोहित होते हैं और जो काम, त्रिपुर, संसारदुःख, यज्ञाभिमान, गजासुर, अंधक तथा मृत्यु के भय का अंत करते हैं।
जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजङ्गमश्वस-
द्विनिर्गमत्क्रमस्फुरत्करालभालहव्यवाट् ।
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः ॥
हिंदी अर्थ: आकाश में घूमते सर्पों की फुँकार, ललाट की ज्वाला और मृदंग की मंगलध्वनि के साथ जो प्रचंड ताण्डव करते हैं, वे शिव सदा विजयी रहें।
स्पृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्गमौक्तिकस्रजोर्-
गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।
तृणारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥
हिंदी अर्थ: कब मैं उस सदाशिव की उपासना करूँगा जो सर्प और मोतियों की माला, रत्न और मिट्टी, मित्र और शत्रु, तिनके और कमलनयन, सामान्य जन और सम्राट, सबमें समभाव रखते हैं।
कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन्
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरः स्थमञ्जलिं वहन् ।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मन्त्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ॥
हिंदी अर्थ: कब मैं गंगातट के एकांत में निवास कर, दूषित विचारों से मुक्त होकर, सिर पर अंजलि रखकर और ‘शिव, शिव’ मंत्र का जप करते हुए सच्चे सुख का अनुभव करूँगा।
इदं हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं
पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेतिसंततम् ।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं
विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिन्तनम् ॥
हिंदी अर्थ: जो मनुष्य इस श्रेष्ठ स्तोत्र को नित्य पढ़ता, स्मरण करता और उच्चारण करता है, वह शुद्ध होता है, शिव और गुरु में भक्ति पाता है और उसके मोह दूर हो जाते हैं।
पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं
यः शम्भुपूजनपरं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरङ्गयुक्तां
लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शम्भुः ॥
हिंदी अर्थ: जो व्यक्ति प्रदोषकाल में पूजा के अंत में रावणकृत इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे भगवान शम्भु स्थिर लक्ष्मी, सम्मान, वैभव और सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।
नमामि पार्वतीपतिं नमामि जाह्नवीपतिं
नमामि भक्तवत्सलं नमामि भाललोचनम् ।
नमामि चन्द्रशेखरं नमामि दुःखमोचनं
तदीयपादपङ्कजं स्मराम्यहं नटेश्वरम् ॥
हिंदी अर्थ: मैं पार्वतीपति, गंगाधर, भक्तवत्सल, त्रिनेत्रधारी, चन्द्रशेखर और दुःखों का नाश करने वाले नटेश्वर शिव को प्रणाम करता हूँ और उनके चरणकमलों का स्मरण करता हूँ।