दैनिक मंत्र
Daily mantra collection with devotional mantras and sacred shlokas.
पावन संग्रह
दैनिक मंत्र
1. महादेव
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे,
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्,
उर्वारुकमिव बन्धनान्,
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
2. श्री गणेश
वक्रतुंड महाकाय,
सूर्य कोटि समप्रभ
निर्विघ्नम कुरू मे देव,
सर्वकार्येषु सर्वदा॥
3. श्री हरि विष्णु
मङ्गलम् भगवान विष्णुः,
मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः,
मङ्गलाय तनो हरिः॥
4. श्री ब्रह्मा जी
ॐ नमस्ते परमं ब्रह्मा,
नमस्ते परमात्ने।
निर्गुणाय नमस्तुभ्यं,
सदुयाय नमो नमः॥
5. श्री कृष्ण
वसुदेवसुतं देवं,
कंसचाणूरमर्दनम्।
देवकी परमानन्दं,
कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्।
6. श्री राम
श्री रामाय रामभद्राय,
रामचन्द्राय वेधसे।
रघुनाथाय नाथाय,
सीताया पतये नमः।
7. माँ दुर्गा
ॐ जयंती मंगला काली,
भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री,
स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥
8. माँ महालक्ष्मी
ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो,
धन धान्यः सुतान्वितः।
मनुष्यो मत्प्रसादेन,
भविष्यति न संशयः ॐ।
9. माँ सरस्वती
ॐ सरस्वति नमस्तुभ्यं,
वरदे कामरूपिणि।
विद्यारम्भं करिष्यामि,
सिद्धिर्भवतु मे सदा॥
10. माँ महाकाली
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं,
हलीं ह्रीं खं स्फोटय,
क्रीं क्रीं क्रीं फट॥
11. हनुमान जी
मनोजवं मारुततुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं,
श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
12. श्री शनिदेव
ॐ नीलांजनसमाभासं,
रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्तण्डसम्भूतं,
तं नमामि शनैश्चरम्॥
13. श्री कार्तिकेय
ॐ शारवाना-भावाया नमः,
ज्ञानशक्तिधरा स्कंदा,
वल्लीईकल्याणा सुंदरा।
देवसेना मनः कांता,
कार्तिकेया नमोस्तुते।
14. काल भैरव जी
ॐ ह्रीं वां बटुकाये,
क्षौं क्षौं आपदुद्धाराणाये,
कुरु कुरु बटुकाये,
ह्रीं बटुकाये स्वाहा।
15. गायत्री मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः,
तत्सवितुर्वरेण्यम्
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात्॥
16. भगवद्गीता 15.5
निर्मानमोहा जितसङ्गदोषा अध्यात्मनित्या विनिवृत्तकामाः।
द्वन्द्वैर्विमुक्ताः सुखदुःखसंज्ञैर्गच्छन्त्यमूढाः पदमव्ययं तत्॥
अर्थवे जो अभिमान और मोह से मुक्त रहते हैं एवं जिन्होंने आसक्ति की बुराई पर विजय पा ली है, जो निरन्तर अपनी आत्मा और भगवान में लीन रहते हैं, जो इन्द्रिय भोग की कामना से मुक्त रहते हैं और सुख-दुख के द्वन्द्वों से परे हैं, ऐसे मुक्त जीव मेरा नित्य धाम प्राप्त करते हैं।
English MeaningThose who are free from pride and delusion, who have conquered the fault of attachment, who remain devoted to the Self and God, who are free from desires, and who rise above pleasure and pain, attain the imperishable divine state.
17. भागवत महिमा
उच्चगानां यथा गंगा देवानामच्युतो यथा।
वैष्णवानां यथा शम्भुः पुराणानामिदं तथा॥
अर्थजिस प्रकार गंगा सभी नदियों में श्रेष्ठ हैं, भगवान अच्युत देवताओं में श्रेष्ठ हैं तथा भगवान शम्भू वैष्णवों में श्रेष्ठ हैं, उसी प्रकार श्रीमद्भागवत सभी पुराणों में श्रेष्ठ है।
English MeaningJust as the Ganga is supreme among rivers, Lord Achyuta among gods, and Lord Shambhu among Vaishnavas, so the Shrimad Bhagavatam is supreme among the Puranas.
18. चतु: श्लोकी गीता
अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते।
इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विताः॥
हिन्दी अर्थमैं ही सबका कारण हूं, मुझसे ही सब कुछ उत्पन्न होता है। ऐसा जानकर ज्ञानीजन प्रेमपूर्वक और भावपूर्वक मेरी भक्ति करते हैं।
English MeaningI am the source of everything; from me all things proceed. Knowing this, the wise worship me with devotion and deep feeling.
मच्छित्ता मद्गतप्राणा बोधयन्तः परस्परम्।
कथयन्तश्च मां नित्यं तुष्यन्ति च रमन्ति च॥
हिन्दी अर्थजो मुझमें चित्त लगाते हैं, अपने प्राणों को मुझमें ही समर्पित करते हैं, वे आपस में मेरा बोध कराते हैं और निरंतर मेरी चर्चा करते हुए संतोष और आनंद का अनुभव करते हैं।
English MeaningWith their minds fixed on me and their lives devoted to me, they enlighten one another and constantly speak of me, finding satisfaction and joy.
तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम्।
ददामि बुद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते॥
हिन्दी अर्थजो मेरे साथ सदा जुड़े रहते हैं और प्रेमपूर्वक मेरी भक्ति करते हैं, उन्हें मैं वह बुद्धियोग प्रदान करता हूं जिससे वे मुझे प्राप्त कर सकें।
English MeaningTo those who are ever united with me and worship me with love, I give the wisdom by which they can come to me.
तेषामेवानुकम्पार्थमहं अज्ञानजं तमः।
नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता॥
हिन्दी अर्थउन पर अनुकम्पा करते हुए, मैं उनके हृदय में स्थित होकर अज्ञान से उत्पन्न अंधकार को दूर कर देता हूं, और ज्ञान के प्रकाश द्वारा उन्हें प्रकाशित करता हूं।
English MeaningOut of compassion for them, I dwell in their hearts and destroy the darkness born of ignorance with the shining lamp of knowledge.
19. श्रीमद्भागवतम् स्कन्ध २, अध्याय ९, श्लोकाः ३३-३६
अहमेवासमेवाग्रे नान्यद्यत्सदसत्परम्।
पश्चादहं यदेतच्च योऽवशिष्येत सोऽस्म्यहम्॥
हिन्दी अर्थसृष्टि के प्रारंभ में केवल मैं ही अस्तित्व में था, मुझसे भिन्न न तो सत् था और न ही असत्। सृष्टि के पश्चात भी मैं ही विद्यमान हूं और जो कुछ शेष रह जाता है, वह भी मैं ही हूं।
English MeaningBefore creation, I alone existed. Nothing else, neither manifest nor unmanifest, was apart from me. After creation, I remain, and whatever remains at the end is also me.
ऋतेऽर्थं यत्प्रतीयेत न प्रतीयेत चात्मनि।
तद्विद्यादात्मनो मायां यथाभासो यथा तमः॥
हिन्दी अर्थजो वस्तु आत्मा से भिन्न प्रतीत होती है, परंतु वास्तव में आत्मा में विद्यमान नहीं है, उसे मेरी माया समझो, जैसे प्रकाश के अभाव में अंधकार और प्रतिबिंब।
English MeaningWhatever appears separate from the Self but is not truly established in the Self should be understood as my maya, like illusion, reflection, or darkness.
यथामहान्ति भूतानि भूतेषूच्चावचेष्वनु।
प्रविष्टान्यप्रविष्टानि तथा तेषु न तेष्वहम्॥
हिन्दी अर्थजैसे समस्त विशाल भूत छोटे-छोटे भूतों में स्थित रहते हुए भी उनमें से भिन्न होते हैं, वैसे ही मैं सब प्राणियों में स्थित होते हुए भी उनसे भिन्न हूं।
English MeaningJust as the great elements enter smaller beings and yet remain distinct from them, I am present in all beings and yet remain beyond them.
एतावदेव जिज्ञास्यं तत्त्वजिज्ञासुनात्मनः।
अन्वयव्यतिरेकाभ्यां यत्स्यात्सर्वत्र सर्वदा॥
हिन्दी अर्थजो सत्य के जिज्ञासु हैं, उनके लिए यही जानने योग्य है कि जो वस्तु सब जगह और सदा विद्यमान है, उसे अन्वय और व्यतिरेक के आधार पर समझा जाए।
English MeaningA seeker of truth should inquire into that reality which exists everywhere and always, understanding it through both presence and absence, connection and distinction.
20. रघुपति राघव राजाराम
रघुपति राघव राजाराम। पतित पावन सीताराम॥
सुंदर विग्रह मेघाश्याम। गंगा तुलसी शालीग्राम॥
भद्रगिरीश्वर सीताराम। भगत-जनप्रिय सीताराम॥
जानकीरमणा सीताराम। जय जय राघव सीताराम॥
21. जय मां कामाख्या
कामाख्यां कामसंपन्ना कामेस्वरी हरप्रियम
कामना देही मे नित्यं कामेस्वरी नमस्तुते॥
जय मां कामाख्या॥