शिव स्तोत्रम

Dedicated page for Shiv Stotram with the full verses in Devanagari.

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Mahadev Stuti

शिव स्तोत्रम

श्लोक १

नाक लोक इक एका आर्व देव बान्धवम
खंड खंड दंड पाणी वीर भद्र केशवम
मुक्ति हिन् की चकुट गर्व भंग तांडवम
नीलकंठ रूद्र रूप सर्व लोक रक्षकम
कृपा करम कठोर कष्ट कृष्ण कर्म नाशकम
मदांध बंध रुंध चेत भक्त वृंद पोषितम शिवम् ...शिवम्..!

Hindi Meaning
यह श्लोक भगवान शिव को देवों के हितैषी, वीरभद्र स्वरूप, नीलकंठ और समस्त लोकों के रक्षक के रूप में प्रणाम करता है। वे जीव के कठोर कष्ट, पाप-कर्म और अहंकार का नाश करते हैं तथा अपने भक्तों का पोषण और संरक्षण करते हैं.
English Meaning
This verse salutes Lord Shiva as the friend of the gods, the fierce and protective force of Veerabhadra, the blue-throated Rudra, and the guardian of all worlds. He destroys suffering, sinful actions, and pride while nourishing and protecting his devotees.
श्लोक २

वृतिरा पोती वायु राकाशा सकुन्तम
भानु कोटि भास्वरम त्रिकाला चित्रुपम
ओम हरम क्रिपा करम गिरीश्वरम महेश्वरम
अगर्व सर्व मंगलम विनाशकाल भी कलम
धीमी धीमी धीमी धीमी भवाधी नृत्य कारकम
ललाट नेत्र धारकम निराकारम त्वम भजे शिवम् ...शिवम्..!

Hindi Meaning
इस श्लोक में शिव को अनंत, प्रकाशमय और तीनों कालों से परे बताया गया है। वे गिरीश्वर, महेश्वर, कृपालु, मंगलकारी और निराकार हैं; उनके ललाट का दिव्य नेत्र और उनका विश्वव्यापी नृत्य सृष्टि, स्थिति और संहार की शक्ति का प्रतीक है.
English Meaning
This verse praises Shiva as infinite, radiant like millions of suns, and beyond all three divisions of time. He is the compassionate Lord of the mountains, the source of all auspiciousness, the formless one whose third eye and cosmic dance express the power behind creation, preservation, and dissolution.
श्लोक ३

धम धम धम धम ध धमरू नाद घर्षणम
असंभवम अगोचरम अचिन्त्य हित चिदंबरम
समस्त लोक शंकरम सहस्त्र नाग कारनाम
त्रिशूल मृत्यु गोचरम प्रभात नेत्र मारदम
मतांत कम यमतांत कम भवांत भयांत कम
अनादि अंत इस्वरम त भक्त वृंद पोषितम शिवम् ...शिवम्..!

Hindi Meaning
यह श्लोक डमरू की गूंज, त्रिशूल की शक्ति और नागों से विभूषित शिव के अद्भुत रूप का वर्णन करता है। वे अचिन्त्य, अगोचर और अनादि-अनंत ईश्वर हैं, जो मृत्यु, भय और सांसारिक बंधनों को हरकर अपने भक्तों की रक्षा करते हैं.
English Meaning
This verse evokes the resonance of Shiva’s damaru, the power of his trident, and his majestic form adorned with countless serpents. He is the inconceivable, unseen, beginningless and endless Lord who removes fear, mortality, and worldly bondage while sustaining his devotees.